गीता मार्ग · 13.16
परमात्मा की निकटता
बहिरन्तश्च भूतानामचरं चरमेव च। सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत्॥
भगवद्गीता 13.16 का अर्थ क्या है?
वह परमात्मा सभी प्राणियों के भीतर और बाहर है। वह सूक्ष्म होने के कारण समझने में कठिन है, लेकिन वह बहुत दूर होते हुए भी हमारे सबसे पास है।
गीता 13.16 को दैनिक जीवन में कैसे अपनाएं?
हमें ईश्वर को ढूंढने कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। वे हमारे हर विचार, हर सांस और हर एहसास में मौजूद हैं। यह अहसास हमें कभी अकेला महसूस नहीं होने देता।
कृष्ण की शिक्षा
श्रीकृष्ण कहते हैं कि परमात्मा ही समस्त सृष्टि और हमारे अस्तित्व का आधार हैं। वे प्रत्येक प्राणी और प्रत्येक वस्तु में व्याप्त होकर सबका पालन और आधार बने हुए हैं।
संकल्प
परमात्मा मुझसे कभी दूर नहीं हैं; वे मेरी हर साँस, हर क्षण और जीवन की हर परिस्थिति में मेरे साथ हैं। विशेषकर कठिन समय में, जब मैं स्वयं को असहाय या कमजोर महसूस करता हूँ, तब मैं उनकी उपस्थिति, शक्ति और सहारे को अपने भीतर अनुभव करता हूँ।
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