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सभी श्लोक

गीता के सभी श्लोक देखें

अध्याय 2
2.3 · कायरता का त्याग2.7 · समर्पण और मार्गदर्शन2.13 · बदलाव का स्वीकार2.14 · धैर्य और सहनशीलता2.20 · अविनाशी अस्तित्व2.22 · विश्राम और नई यात्रा2.25 · आत्मा का रहस्य2.27 · अटल व्यवस्था2.47 · निस्वार्थ सेवा2.48 · समता का योग2.50 · कर्म की कुशलता2.56 · स्थिर मन की शक्ति2.60 · चंचल इन्द्रियाँ2.61 · स्थिर प्रज्ञा2.62 · विचारों की श्रृंखला2.63 · क्रोध का परिणाम2.66 · शान्ति और सुख2.70 · अचल शान्ति2.71 · परम शान्ति
अध्याय 3
3.2 · स्पष्टता की प्रार्थना3.8 · कर्म की पावनता3.19 · लगाव से परे कर्म3.20 · समाज सेवा का योग3.30 · समर्पित कर्म3.37 · भीतर का शत्रु3.41 · आत्म-अनुशासन3.43 · भीतर की विजय
अध्याय 4
4.7 · धर्म का आश्वासन4.8 · सत्य की विजय4.10 · डर से मुक्ति4.11 · श्रद्धा का उत्तर4.13 · स्वभाव और कर्म4.34 · सीखने की विनम्रता4.36 · आशा की किरण4.37 · भीतर का बदलाव4.39 · श्रद्धा और ज्ञान
अध्याय 5
5.10 · कमल के समान जीवन5.18 · समान दृष्टि5.19 · संसार पर विजय5.21 · अक्षय सुख5.22 · क्षणभंगुर सुख5.26 · आन्तरिक स्वतन्त्रता5.29 · परम सुहृद
अध्याय 6
6.5 · स्वयं का उत्तरदायित्व6.6 · भीतर का तालमेल6.16 · अति का त्याग6.17 · जीवन की लय6.26 · भटके मन की वापसी6.30 · सर्वत्र ईश्वरीय दर्शन6.32 · करुणा का मार्ग6.35 · विजय का सूत्र
अध्याय 7
7.7 · एकमात्र आधार7.14 · माया से पार
अध्याय 8
8.5 · अन्तिम विचार8.7 · सतत स्मरण8.28 · सर्वोच्च स्थान
अध्याय 9
9.22 · ईश्वरीय सुरक्षा9.26 · प्रेम का अर्पण9.27 · कर्म का अर्पण9.29 · समान प्रेम9.30 · नई शुरुआत9.34 · निरन्तर स्मरण
अध्याय 10
10.3 · अनन्त का बोध10.10 · बुद्धि का प्रकाश10.20 · हृदय में परमात्मा10.41 · ईश्वरीय विभूति
अध्याय 11
11.32 · समय की महाशक्ति11.33 · निमित्त मात्र11.44 · विनम्र क्षमा11.50 · सौम्य आश्वासन
अध्याय 12
12.13 · मैत्री और करुणा12.14 · अन्तर्मन की सन्तुष्टि12.15 · शान्त व्यक्तित्व
अध्याय 13
13.16 · परमात्मा की निकटता13.18 · हृदय की ज्योति13.27 · एकता की दृष्टि
अध्याय 14
14.6 · सत्त्व गुण का प्रकाश14.17 · गुणों का प्रभाव14.26 · भक्ति की शक्ति
अध्याय 15
15.7 · दिव्य आत्मा15.15 · बुद्धि का आधार
अध्याय 16
16.1 · साहस और शुद्धि16.2 · कोमलता और शान्ति16.3 · धैर्य और विनम्रता16.4 · अहंकार का बोझ16.13 · लालच का भ्रम16.14 · शक्ति का नशा16.15 · दिखावे का खालीपन16.19 · द्वेष का परिणाम16.21 · तीन विनाशकारी द्वार
अध्याय 17
17.15 · वाणी की मिठास17.25 · निस्वार्थ सेवा
अध्याय 18
18.26 · सात्त्विक कर्ता18.30 · विवेक की स्पष्टता18.39 · तामसिक सुख का त्याग18.46 · कर्म ही पूजा18.48 · स्वभावगत कर्म18.58 · अहंकार की चेतावनी18.61 · हृदय का स्वामी18.63 · विवेक का सम्मान18.65 · समर्पित मन18.66 · अभय दान18.71 · श्रवण का फल18.78 · विजय का उद्घोष