गीता मार्ग · 14.17
गुणों का प्रभाव
सत्त्वात्सञ्जायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च। प्रमादमोहौ तमसो भवतोऽज्ञानमेव च॥
भगवद्गीता 14.17 का अर्थ क्या है?
सत्त्व गुण से ज्ञान उत्पन्न होता है, रजोगुण से लोभ (लालच), और तमोगुण से प्रमाद (लापरवाही), मोह और अज्ञान उत्पन्न होते हैं।
गीता 14.17 को दैनिक जीवन में कैसे अपनाएं?
हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही बनते हैं। अगर हम हमेशा लालच में रहेंगे (रजस) या आलस्य करेंगे (तमस), तो हम कभी शान्ति नहीं पा सकेंगे। इसलिए हमेशा ज्ञान और सन्तुलन (सत्त्व) को चुनने का प्रयास करें।
कृष्ण की शिक्षा
श्रीकृष्ण कहते हैं कि ज्ञान और प्रकाश की प्राप्ति सत्त्वगुण से होती है। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन में सत्त्वगुण को बढ़ाने वाले शुद्ध विचार, श्रेष्ठ कर्म और सात्त्विक आचरण अपनाने चाहिए, क्योंकि यही उसे उन्नति और अंततः मोक्ष के मार्ग की ओर ले जाते हैं।
संकल्प
मैं लोभ और आलस्य को छोड़कर ज्ञान और शान्ति की ओर बढ़ रहा हूँ।
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