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गीता मार्ग · 2.63

क्रोध का परिणाम

क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः। स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥

भगवद्गीता 2.63 का अर्थ क्या है?

क्रोधसे भ्रम पैदा होता है। भ्रमसे स्मृति कमजोर होती है। स्मृति कमजोर पड़नेसे बुद्धि नष्ट होती है, और अंतमें बुद्धि नष्ट होनेसे व्यक्ति ही नष्ट हो जाता है।

गीता 2.63 को दैनिक जीवन में कैसे अपनाएं?

गुस्से में कही गई बातें अक्सर बाद में पछतावा बन जाती हैं। यह श्लोक याद दिलाता है कि एक क्षण का क्रोध कई रिश्तों और निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।

कृष्ण की शिक्षा

श्रीकृष्ण सिखाते हैं कि मन को संभालना बाहरी दुनिया को जीतने से अधिक महत्वपूर्ण है। शांत मन ही सही निर्णय ले सकता है।

संकल्प

जब मुझे क्रोध आता है, मैं तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता। मैं रुकता हूँ, शांत होता हूँ और फिर विवेकपूर्वक प्रतिक्रिया करता हूँ।

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