गीता मार्ग · 9.22
ईश्वरीय सुरक्षा
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥
भगवद्गीता 9.22 का अर्थ क्या है?
जो लोग अनन्य भाव से मेरा चिन्तन करते हुए मेरी उपासना करते हैं, उन नित्य मुझमें स्थित भक्तों की आवश्यकताओं को मैं पूरा करता हूँ और उनकी रक्षा करता हूँ।
गीता 9.22 को दैनिक जीवन में कैसे अपनाएं?
जब जीवन में चारों ओर अंधेरा लगे और कोई रास्ता न सूझे, तब यह श्लोक एक रोशनी की तरह है। श्रीकृष्ण वचन देते हैं कि जो पूरी तरह उन पर आश्रित हैं, उनका ध्यान रखना उनकी जिम्मेदारी है। आप अकेले नहीं हैं।
कृष्ण की शिक्षा
श्रीकृष्ण आश्वासन देते हैं कि सच्चा समर्पण कभी खाली नहीं जाता।
संकल्प
परमात्मा मेरा योग-क्षेम सम्भाले हुए हैं, मैं उनकी छाँव में हूँ।
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