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गीता मार्ग · 10.10

बुद्धि का प्रकाश

तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्। ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते॥

भगवद्गीता 10.10 का अर्थ क्या है?

जो भक्त निरंतर प्रेम और श्रद्धा के साथ मेरी भक्ति और सेवा में लगे रहते हैं, उन्हें मैं वह बुद्धियोग प्रदान करता हूँ, जिसके द्वारा वे मुझे प्राप्त कर सकते हैं।

गीता 10.10 को दैनिक जीवन में कैसे अपनाएं?

जब हमारा मन शान्त और श्रद्धावान होता है, तो हमें सही निर्णय लेने की शक्ति अपने आप मिलने लगती है। ईश्वर बाहर नहीं, हमारे भीतर बुद्धि बनकर हमारा मार्गदर्शन करते हैं।

कृष्ण की शिक्षा

श्रीकृष्ण बताते हैं कि वे ही हमारी बुद्धि को प्रकाश देते हैं जब हम समर्पण के लिए तैयार होते हैं।

संकल्प

मेरे भीतर बुद्धि की वह दिव्य रोशनी जल उठी है जो मुझे परमात्मा से जोड़ती है।

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