गीता मार्ग · 10.20
हृदय में परमात्मा
अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः। अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च॥
भगवद्गीता 10.20 का अर्थ क्या है?
हे अर्जुन! मैं सभी प्राणियों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ। मैं ही समस्त प्राणियों का आदि (शुरुआत), मध्य (जीवन) और अन्त हूँ।
गीता 10.20 को दैनिक जीवन में कैसे अपनाएं?
जब हम खुद को अकेला महसूस करते हैं, तो यह श्लोक याद दिलाता है कि ईश्वर हमारे सबसे करीब—हमारे ही भीतर हैं। हमें बाहर कहीं ढूंढने की जरूरत नहीं है, बस अपने भीतर झांकने की जरूरत है।
कृष्ण की शिक्षा
श्रीकृष्ण बताते हैं कि दिव्यता हमारे अस्तित्व का ही केन्द्र है।
संकल्प
मैं कभी अकेला नहीं हूँ, मेरा प्रभु मेरे ही हृदय की धड़कन में बसता है।
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