गीता मार्ग · 16.13
लालच का भ्रम
इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम्। इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम्॥
भगवद्गीता 16.13 का अर्थ क्या है?
अहंकारी व्यक्ति सोचता है: 'आज मैंने यह पा लिया, अब मैं अपनी इस इच्छा को पूरा करूँगा। इतना धन मेरे पास है और भविष्य में और भी होगा।'
गीता 16.13 को दैनिक जीवन में कैसे अपनाएं?
हम अक्सर 'आज' को खो देते हैं क्योंकि हमारा मन 'कल' की कमाई और खर्च की गिनती में लगा रहता है। यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि केवल धन और वस्तुओं को जोड़ना ही जीवन नहीं है। यह 'पा लेने' की भूख कभी शान्त नहीं होती।
कृष्ण की शिक्षा
श्रीकृष्ण बताते हैं कि जब हम भविष्य के लालच में जीते हैं, तो वर्तमान की शान्ति खो देते हैं।
संकल्प
मैं 'कल' की दौड़ को छोड़कर आज के पावन क्षण में गहरी तृप्ति महसूस कर रहा हूँ।
सुझाव या प्रतिक्रिया दें · 16.13