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गीता मार्ग · 3.2

स्पष्टता की प्रार्थना

व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे। तदेकं वद निश्चित्य येन श्रेयोऽहमाप्नुयाम्॥

भगवद्गीता 3.2 का अर्थ क्या है?

अर्जुन कहता है—आपकी बातों से मेरी बुद्धि भ्रमित हो रही है। कृपया मुझे निश्चित रूप से वह एक मार्ग बताइए जो मेरे कल्याण के लिए सबसे उत्तम हो।

गीता 3.2 को दैनिक जीवन में कैसे अपनाएं?

जब हमारे सामने बहुत सारे विकल्प हों और मन उलझन में हो, तो सबसे अच्छा है कि हम किसी अनुभवी गुरु या अपने अन्तर्मन से स्पष्टता की प्रार्थना करें। सच्चाई हमेशा सरल और स्पष्ट होती है।

कृष्ण की शिक्षा

श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब मन उलझन में फंसा होता है, तभी विकास की शुरुआत होती है। बस! शर्त यह है कि तुम सही व्यक्ति से सही प्रश्न पूछो।

संकल्प

ईश्वर की ज्योति मेरे हर संशय को मिटा रही है।

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