गीता मार्ग · 3.30
समर्पित कर्म
मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा। निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः॥
भगवद्गीता 3.30 का अर्थ क्या है?
अपने सभी कर्मों को मुझमें अर्पित करके, आशा, ममता और मानसिक ताप (जलन) से रहित होकर अपना कर्तव्य करो।
गीता 3.30 को दैनिक जीवन में कैसे अपनाएं?
जब हम यह सोचते हैं कि 'यह मेरा है' या 'इसका फल मुझे मिलना चाहिए', तो हम तनाव में आ जाते हैं। इसके बजाय, यह सोचें कि आप ईश्वर का काम कर रहे हैं। यह भाव आपको हर चिन्ता से मुक्त कर देगा।
कृष्ण की शिक्षा
श्रीकृष्ण कहते हैं कि सब कुछ परमात्मा ही करता है। परमात्मा की इच्छा के बिना पेड़ का पत्ता भी हिल नहीं सकता। इसलिए कर्म करते हुए भी ईश्वर ही सब कुछ करता है, यह समझना चाहिए।
संकल्प
मैं अपने सारे बोझ परमात्मा को सौंपकर पूरी तरह हल्का और शान्त हूँ।
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