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गीता मार्ग · 4.11

श्रद्धा का उत्तर

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्। मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः॥

भगवद्गीता 4.11 का अर्थ क्या है?

जो जिस भाव से मेरी शरण में आता है, मैं उसे उसी प्रकार फल देता हूँ। सभी मनुष्य हर प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं।

गीता 4.11 को दैनिक जीवन में कैसे अपनाएं?

जब हम ईश्वर द्वारा बताए गए मार्ग पर चलते हुए सच्चे मन और श्रद्धा से उन्हें पुकारते हैं, तो वे निश्चित रूप से हमारी सहायता करते हैं।

कृष्ण की शिक्षा

श्रीकृष्ण सिखाते हैं कि वे हमारी भक्ति का बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि हमारे हृदय के सच्चे भाव को देखते हैं। हमारी पुकार में जैसा भाव होता है, ईश्वर की कृपा भी उसी भाव के अनुरूप प्राप्त होती है।

संकल्प

मैं जिस रूप में पुकारता हूँ, ईश्वर उसी रूप में मुझे सहारा देते हैं।

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